कॉमन साक्षात्कार में बाडी लैंग्वेज (Body Language) का महत्त्व

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सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने के लिए क्वालिफाइड अभ्यर्थियों को साक्षात्कार-बोर्ड्स का सामना करना होता है। शुरू में प्रत्येक अभ्यर्थी को घबराहट होती है, जिससे अंतत: उसका निष्पादन प्रभावित होता है ।आज का हमारा लेख साक्षात्कार-सत्र में बाडी लैंग्वेज(body language) के महत्त्व के बारे में हैं। जिसमें हम आपको अच्छा निष्पादन करने के लिए कुछ उपाय और दिशानिर्देश देगे, जिससे आप पूरे आत्मविश्वास के साथ साक्षात्कार दे सकेंगे।

साक्षात्कार में बॉडी लैंग्वेज

साक्षात्कार अभ्यर्थी और साक्षात्कार लेने वाले के बीच आमने-सामने की अंत:क्रिया (इंटर-एक्शन) होती है। यह अभ्यर्थी के सूक्ष्म गुणों का आकलन करने में बहुत उपयोगी होता है।यह अभ्यर्थी की पहल करने की क्षमताओं, मानसिक जागरूकता, आत्मविश्वास आदि का पता लगाने में सहायता करता है।   साक्षात्कार के समय आपकी बॉडी लैंग्वेज बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। कई बार आपके शरीर की भाषा अपने शब्दों से मेल नहीं खाती। समूह चर्चा में भी आपकी बॉडी लैंग्वेज और आपकी शारीरिक मुद्रा बहुत मायने रखती हैं। याद रखे कि साक्षात्कार देने वाले का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग है उसका व्यक्तित्व और व्यवहार ही होता है।

बॉडी लैंग्वेज के लिए ध्यान रखने योग्य बातें

1.नेत्र संपर्क:   – बॉडी लैंग्वेज का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु नेत्र संपर्क हैं। अगर आप साक्षात्कार दे रहे हैं ,तो आप नेत्र संपर्क बनाकर रखे।अगर आप साक्षात्कार देते समय इधर उधर देखते हैं तो यह दर्शाता हैं कि आपका आत्मविश्वास का स्तर कितना है। लेकिन ऐसा ज़रूरत से थोड़ा भी कम या थोड़ा भी ज़्यादा करना किसी अन्य तरह के व्यवहार का संकेत देता है।”  कुछ लोग अच्छी तरह आंखों में देखने का मतलब यह लगाते हैं कि नज़रें हटाना ही नहीं है, लेकिन यह भी गलत है। “बोलते हुए बीच-बीच में नज़र हटा लेना सामान्य बात है, क्योंकि ऐसा करते हुए आप अपनी याददाश्त पर ज़ोर डालकर अपने दिमाग़ में मौजूद सूचनाओं तक पहुँचने का प्रयास कर रहे होते हैं। पर जब इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति बोल रहा हो, उस समय अपनी नज़र को भटकने मत दीजिए।”

  1. आक्रामक व्यवहार से बचे : –अगर आपका व्यवहार आक्रामक हैं ,तो आपको इस पर ज्यादा ध्यान देना होगा। समूह चर्चा में आक्रामक इशारों से बचें। समूह चर्चा के दौरान अगर आप किसी की बात से सहमत नही हैं, तो ऐसी कोई मुद्रा न करे ,जिससे सामने वाले को यह लगे कि आप हिंसक व्यवहार के हैं। अगर आप बोलते समय किसी की तरफ उंगली का प्रयोग करते हैं तो यह अनुचित माना जाता हैं। ध्यान रखे कि बोलते समय हाथों की मुद्रा ठीक हो।

3.व्याकुलता के लक्षणों से बचें – साक्षात्कार देते समय व्याकुलता के लक्षणों से बचें। बालों पर हाथ फेरना, हाथों की उँगलियाँ को बार- बार खीचना,पेन के साथ खेलना,की रिंग के साथ खेलना, आदि मुद्राओ को न करे ।

4.सही शारीरिक मुद्रा में बैठे – साक्षात्कार देते समय सही शारीरिक मुद्रा में बैठे। कुछ लोग एक कुर्सी पर बैठते हैं और दूसरी कुर्सी पर हाथ या सिर रखते हैं या फिर लेट कर बैठते हैं। यह सभी अनुचित शारीरिक मुद्राओ में आती हैं। ऐसा न करे।

5.हाथ की अधिक चेष्टाओं से बचें  – अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे हाथ से अधिक चेष्टाएँ करने से बचें, क्योंकि यह बोर्ड के सदस्यों के मन में बुरा प्रभाव पैदा करता है।

6.प्रवाह – ये ज़रूरी नही है कि आप वाक्यों को आप बहुत तेज़ी से बोले आप जिस भी वाक्य का प्रयोग करे आप उसे रुक रुक कर न बोले उसे प्रवाह के साथ बोले।

7.चेहरे की अभिव्यक्ति – साक्षात्कार देते समय आप गुस्से , घृणा , हताशा ,व्यंग्य अनावश्यक हंसी आदि भावो से बचे। चेहरे की अभिव्यक्ति साक्षात्कार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

8.अवांछित बनावटी व्यवहार से बचना – अल्पभाषिक (बहुत थोड़े में) उत्तर देना यह ऐसा आभास देता है कि अभ्यर्थी को विषय का ठोस ज्ञान नहीं है। इतनी धीमी आवाज में उत्तर न दें, जिसे बोर्ड सुन ही न पाए क्योंकि इससे अप्रिय स्थिति पैदा होती है।

9.उच्चारण पर ध्यान दे शब्दों का प्रयोग करते समय उनका उच्चारण सही रूप से करे।

10.उचित शब्दों का प्रयोग करे – वाक्यों में सही और उचित शब्दों का प्रयोग करे।

 

अगर आप दी गई सभी टिप्स का पालन करे तो आप परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते। अभ्यर्थियों को बेहतर अंक लाने के लिए सिर्फ पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों और ऑनलाइन प्रश्नपत्रों का अधिकाधिक अभ्यास करने की आवश्यकता है।

 

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