hindi banking awareness capsule

साप्ताहिक बैंकिंग अवेयरनेस कैप्सूल 1(Hindi Banking Awareness Capsule)

प्यारे मॉकबैंकर्स,
इस लेख में आपको साप्ताहिक बैंकिंग अवेयरनेस कैप्सूल के माध्यम से बैंकिंग अवेयरनेस के विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त होगी।
बैंकिंग अवेयरनेस खण्ड, भारत में आयोजित अधिकांश बैंकिंग/भर्ती परीक्षाओं का एक आवश्यक भाग बन गया है। मूलतः इसमें यह देखा जाता है कि उम्मीदवार को बैंकिंग उद्योग के विशेष संदर्भ में बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र का कितना ज्ञान है।
इस लेख में, हम बैंकिंग की महत्वपूर्ण (बैंकिंग की A – Z) शब्दावली की सूची प्रदान कर रहे हैं।

एटीएम (ऑटोमेटेड टेलर मशीन):

यह मशीन कंप्यूटर नेटवर्क के माध्यम से ग्राहकों को नकदी निकालने, शेष राशि विवरण, एवं खाता संबंधी संक्षिप्त विवरण की जानकारी देने की सुविधा प्रदान करती है|

बैंक ऐस्स्योरेंस:

बैंकों द्वारा एजेंट के रूप में अपनी शाखाओं के माध्यम से बीमा उत्पादों एवं बीमा कंपनियों की पॉलिसीस का वितरण।

चेक बाउंस:

जब खातेदार के अकाउंट में पर्याप्त धनराशि न होने की वजह से चेक को संसाधित नहीं किया जा सके। बाउंस चेक अक्सर गैर पर्याप्त धन के लिए दंड-शुल्क के साथ भुगतान कर्ता को लौटा दिया जाता है।

बैंक दर:

केंद्रीय बैंक द्वारा वाणिज्यिक बैंक को दिए गए ऋण एवं अग्रिमों पर लागू ब्याज की दर।

कॉल मनी:

कॉल मनी अल्पकालिक वित्त को कहते हैं जो मांग पर प्रतिदेय होता है एवं जिसकी परिपक्वता अवधि एक से चौदह दिन की होती है।

चेक:

चेक एक दस्तावेज है, जिसके द्वारा भुगतानकर्ता के खाते से उस व्यक्ति को जिसके नाम पर चेक जारी कर दिया गया है, एक विशेष धन राशि का भुगतान करने के लिए बैंक को आदेश दिया जाता है।

कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस (सीबीएस):

कोर बैंकिंग सोल्यूशन (सीबीएस) के तहत बैंक की सभी शाखायें जुड़ी होती हैं, जो ग्राहकों को बैंक की किसी भी शाखा से उनके खातों को संचालित करने एवं अन्य बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए सक्षम बनाता है।

सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात):

धन की एक निश्चित राशि जो बैंकों द्वारा रिजर्व बैंक ओफ इंडिया के पास जमा की जाती है। यदि केंद्रीय बैंक सीआरआर में वृद्धि करने का फैसला करता है, तो बैंकों के पास उपलब्ध राशि में कमी आ जाती है।

चालू खाता:

चालू खाता, जमा खाते का एक प्रकार है, जो धन निकालने एवं चेक जारी करने की अनुमति देता है।

डेबिट कार्ड:

डेबिट कार्ड एक भुगतान कार्ड है जो खरीद का भुगतान करने के लिए उपभोक्ता के चेकिंग अकाउंट से पैसे काट लेता है। इसका इस्तेमाल पैसे निकालने के लिए भी किया जा सकता है।

ई-बैंकिंग:

बैंकिंग की एक विधि है जो ग्राहक को इंटरनेट के जरिए लेनदेन करने में सक्षम बनाती है।

राजकोषीय घाटा:

सरकार द्वारा किये गए व्यय एवं आय (उधार लिया गया धन छोड़कर) के बीच के अंतर को राजकोषीय घाटा कहते हैं।

मुद्रास्फीति की दर:

बाज़ार में मुद्रा का प्रसार व वस्तुओ की कीमतों में वृद्धि न होने के कारण मूल्य स्तर में एक असामान्य बढ़त।

लिक्विडिटी:

मूल्य में बिना किसी हानि के किसी संपत्ति के नकदी में शीघ्र परिवर्तित होने की क्षमता ।

बाजार पूंजीकरण:

बकाया शेयरों की कुल संख्या एवं मौजूदा शेयर की कीमत के आधार पर कंपनी का कुल मूल्यांकन।

बंधक:

ऋण के पुनर्भुगतान के लिए सुरक्षा के रूप में संपत्ति का प्रतिबन्धित हस्तांतरण।

म्यूचुअल फंड:

निवेश योजना जिसके तहत प्रतिभूतियों की खरीद करने के लिए विभिन्न निवेशकों से धन का समुच्चय किया जाता है।

मौद्रिक नीति:

केंद्रीय बैंक, मुद्रा बोर्ड या अन्य नियामक समिति द्वारा की गई कार्रवाई जिसके द्वारा धन आपूर्ति के विस्तार एवं विकास की दर का निर्धारण किया जाता है, जो बदले में ब्याज दरों को प्रभावित करती है।

गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए):

एनपीए या गैर निष्पादित ऋण बैंक द्वारा दिए गए ऐसे ऋण हैं जिनका भुगतान या ब्याज का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा हो।

स्थायी खाता संख्या (पैन):

पैन एक दस अंकों का विशिष्ट अल्फान्यूमेरिक नंबर है जिसे आयकर विभाग द्वारा भारतीय आयकर अधिनियम 1961 के तहत अभिज्ञेय सभी न्यायिक हस्तियों को जारी किया जाता है।

प्लास्टिक मनी:

बैंक कार्ड, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, स्मार्ट कार्ड आदि के सभी प्रकारों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सामान्य शब्द।

प्वाइंट ऑफ़ सेल (पीओएस):

स्थान, जहाँ खुदरा लेनदेन किया जाता है।

मूल उधारी दर (पीएलआर):

ब्याज की दर जिस पर एक बैंक अपने सबसे विश्वसनीय ग्राहकों (‘शून्य जोखिम’ वाले ग्राहक) को ऋण प्रदान करता है।

पास बुक:

बैंक द्वारा खाता-धारक के लिए जारी की गई एक किताब जिसमें जमा एवं निकाली गई रकम का अभिलेख होता है।

रेपो दर:

जिस दर पर रिजर्व बैंक द्वारा वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार दिया जाता है उसे रेपो दर कहते है। यह मौद्रिक नीति का एक साधन है। जब भी बैंकों के पास धन की कोई कमी होती है वे भारतीय रिजर्व बैंक से उधार ले सकते हैं। रेपो दर में कमी होने से बैंकों के लिए एक सस्ती दर पर धन मिलने में मदद मिलती है, इसके विपरीत रेपो दर में वृद्धि होने से महँगी दरों पर धन मिलता है।

रिवर्स रेपो दर:

यह रेपो दर के एकदम विपरीत है। यह वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों से धन उधार लेता है जब उसे यह लगता है कि बैंकिंग प्रणाली में बहुत ज्यादा धन चलायमान है।

एसएलआर (सांविधिक तरलता अनुपात):

सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) एक निश्चित रकम है जिसे वाणिज्यिक बैंकों को ग्राहकों के लिए ऋण उपलब्ध कराने से पहले नकदी, सोना एवं सरकार द्वारा मंजूर प्रतिभूतियों के रूप में बनाये रखना जरूरी होता है।

टेलर:

बैंक के स्टाफ का सदस्य जो ग्राहकों के लिए चेक भुनाने एवं नकदी स्वीकारने जैसी विभिन्न बैंकिंग सेवाऐं प्रदान करता है।

वर्चुअल बैंकिंग:

वर्चुअल बैंकिंग एक प्रावधान है जिसके तहत व्यक्तिगत तौर पर बैंक की शाखा/कार्यालय में जाने की बजाय बैंक संबंधित सेवाओं को ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है।

व्हाइट लेबल एटीएम:

एक एटीएम या नकदी मशीन जिस पर विशिष्ट रूप से किसी बैंक का नाम या लोगो प्रदर्शित नहीं होता है। इन एटीएम में नकदी की निकासी के लिए शुल्क लिया जाता है एवं इनमें नकदी जमा करने की सुविधा नहीं होती है।

होलसेल बैंकिंग:

बैंकों द्वारा मॉर्गेज ब्रोकर्स, बड़े कॉर्पोरेट ग्राहकों, मध्य आकार की कंपनियों, रियल एस्टेट डेवलपर्स और निवेशकों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार वित्त व्यवसायों, संस्थागत ग्राहकों (जैसे पेंशन फंड और सरकारी संस्थाओं/एजेंसियों) के लिए सेवाओं का प्रावधान एवं अन्य बैंकों या अन्य वित्तीय संस्थानों को प्रदान की गई सेवाऐं।

जीरो कूपन बॉन्ड:

बांड जिसे इसकी फेस वैल्यू की तुलना में अधिक डिस्काउंट पर जारी किया जाता है लेकिन कोई ब्याज नहीं दिया जाता।
दोस्तो, साप्ताहिक बैंकिंग अवेयरनेस कैप्सूल के बारे में बस इतना ही। हम इसी तरह हर सप्ताह, साप्ताहिक बैंकिंग अवेयरनेस कैप्सूल आपके साथ साझा करेंगे। अगर आपके पास कोई भी सुझाव या प्रश्न हैं तो कृपया उन्हें नीचे टिप्पणी अनुभाग में पोस्ट कर दें।

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